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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की है। जेडीयू को 85 और बीजेपी को 89 सीटें मिलीं। भाजपा के बड़े भाई बनने के बावजूद मुख्यमंत्री का पद नीतीश कुमार को मिला, लेकिन इस बार सबसे बड़ा फेरबदल मंत्रालयों में हुआ है।
बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को बिहार का गृह मंत्रालय मिला है, जो पिछले लगभग 20 वर्षों से नीतीश कुमार के पास था। यही कारण है कि इसे बिहार की राजनीति में “सबसे बड़ा पावर शिफ्ट” माना जा रहा है।
क्यों अहम है गृह मंत्रालय?
बिहार जैसे बड़े राज्य में कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के पास होती है। शासन की मजबूती, अपराध पर नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े अधिकांश फैसले यहीं से लिए जाते हैं। यही वजह है कि इस मंत्रालय को अक्सर मुख्यमंत्री का “हाफ पॉवर सेंटर” कहा जाता है।
सम्राट चौधरी के पास क्या-क्या पावर होंगी?
सम्राट चौधरी अब उन सभी महत्वपूर्ण विभागों और फैसलों के प्रभारी होंगे, जो सीधे तौर पर राज्य की सुरक्षा और पुलिस प्रशासन को प्रभावित करते हैं:
1. पुलिस विभाग पर पूरी कमान
डीजीपी (DGP)
एडीजी (ADG)
आईजी (IG)
एसपी (SP)
डीएसपी (DSP)
सभी बड़े पुलिस अधिकारी गृह मंत्री को सीधे रिपोर्ट करेंगे।
2. ट्रांसफर–पोस्टिंग का अधिकार
राज्य के पुलिस अधिकारियों की तैनाती, स्थानांतरण और प्रमोशन की बड़ी भूमिका गृह मंत्री के अधीन रहती है।
3. कानून-व्यवस्था का संचालन
राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराध नियंत्रण तक—हर स्तर पर गृह मंत्री की सीधी भूमिका होती है।
4. दंगे, हिंसा और बड़ी गिरफ्तारियाँ
किस बड़े मामले में क्या कार्रवाई करनी है, किस स्तर पर पुलिस को हस्तक्षेप करना है—ये फैसले गृह मंत्री के निर्देश पर लिए जाते हैं।
5. नेताओं–VIPs की सुरक्षा तय करना
किस नेता या व्यक्ति को Z+, Z, Y, या X कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी, इसका निर्णय भी गृह मंत्रालय करता है।
6. जेल प्रशासन पर अधिकार
राज्य की जेलें, कैदियों की निगरानी और अंदर की व्यवस्था भी गृह विभाग के अधीन होती है।
7. खुफिया विभाग की रिपोर्टिंग
बिहार का इंटेलिजेंस विभाग (स्पेशल ब्रांच) सीधे गृह मंत्री को रिपोर्ट करता है।
नीतीश कुमार के पास क्या रहेगा?
हालाँकि गृह मंत्रालय बीजेपी को मिल गया है, लेकिन मुख्यमंत्री के पास अब भी राज्य की कई बड़ी प्रशासनिक शक्तियाँ रहती हैं:
1. प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण
डीएम (जिलाधिकारी)
एसडीएम
अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी
ये सभी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करते हैं।
2. नीति-निर्माण और सरकार के बड़े फैसले
राज्य के विकास, योजनाओं और नीति-निर्माण से जुड़े निर्णय CM स्तर पर ही लिए जाते हैं।
3. सरकार का अंतिम निर्णय अधिकार
कैबिनेट से लेकर बजट तक—प्रशासनिक दिशा तय करने में मुख्यमंत्री की भूमिका सर्वोपरि रहती है।
हालांकि, सुशासन के नाम पर जो बड़ी शक्ति नीतीश कुमार के पास थी—गृह विभाग की कमान—अब वह उनके हाथ में नहीं है। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि आगे की राजनीति में नेतृत्व की वास्तविक ड्राइविंग सीट किसके पास रहेगी।
